*** इंसान कहलाता है।***

क्या ये जानवर भी अब इंसान कहलाता है? मासूम पर दिखाकर ज़ोर,  खुद को बलवान बताता है। दरिंदगी का दिखाकर नाच, धर्म और ज़ात की आड़ में छुप जाता है। जाने कितनी आसिफ़ा के सामने हिन्दू, और निर्भया के सामने मुसलमान बन जाता है। धर्म का ये पाठ, वो आकर मुझे भी बताएं, क़ुरान के […]

अब इससे ज्यादा क्या होगा?

वो पंडित जी की परी सयानी, थोड़ी नटखट, थोड़ी दीवानी, मैं बालक अल्हड़ अज्ञानी, सुबह मस्त और शाम रूहानी, इतनी सी थी मेरी कहानी, सुबह रोज़ मंदिर वो जाया करे, वो मेरी गली में भी आया करे, मैं नज़रे मिलाने की जो कोशिश करूँ वो नज़रे चुरा के मुड़ जाया करे, फिर एक रोज़ उसने […]

***दिल करता है!***

मालूम है के अंत में गुमनामी के सिवा कुछ नहीं, पर तेरे नाम से बदनाम होने को दिल करता है। तू कल न थी, आज है, कल फिर न होगी, आज का हर पल तेरे साथ जीने को दिल करता है। मालूम है के तेरी-मेरी मंजिल एक नहीं, पर जो राह तू ले उस पर […]