अब इससे ज्यादा क्या होगा?

वो पंडित जी की परी सयानी, थोड़ी नटखट, थोड़ी दीवानी, मैं बालक अल्हड़ अज्ञानी, सुबह मस्त और शाम रूहानी, इतनी सी थी मेरी कहानी, सुबह रोज़ मंदिर वो जाया करे, वो मेरी गली में भी आया करे, मैं नज़रे मिलाने की जो कोशिश करूँ वो नज़रे चुरा के मुड़ जाया करे, फिर एक रोज़ उसने […]

**तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो!!!**

यूँ तो ये कहना गलत होगा के तुम्हारी याद नहीं आती, ना जाने कितना वक़्त हो गया है तुम्हे गए हुए फिर भी कुछ एक बातें तुम्हारी दिल-दिमाग में घर कर गयी हैं। आज भी जब कोई तुम्हारा वाला परफ्यूम लगा के करीब से निकल जाता है, उस अनजान भीड़ में मेरी आँखे तलाशने लग […]