अब इससे ज्यादा क्या होगा?

वो पंडित जी की परी सयानी, थोड़ी नटखट, थोड़ी दीवानी, मैं बालक अल्हड़ अज्ञानी, सुबह मस्त और शाम रूहानी, इतनी सी थी मेरी कहानी, सुबह रोज़ मंदिर वो जाया करे, वो मेरी गली में भी आया करे, मैं नज़रे मिलाने की जो कोशिश करूँ वो नज़रे चुरा के मुड़ जाया करे, फिर एक रोज़ उसने […]

वो माँ है, सब जानती है।

वो माँ है, सब जानती है। बचपन में जो खिलौना पापा से मांगने में डर लगता है, तुम्हारे सोने के बाद वो उनको बताती है। सुबह नाश्ते से लेकर रात तक सबका खाना बनाती है, तुम भूखे ना रहो इसलिए सुबह अँधेरे में ही जग जाती है, वो माँ है, सब जानती है। कम नंबर […]