***दूरी***

अजीत एक नामी सॉफ्टवेयर कम्पनी में काम करता था। अपनी शादी के लिए 15 दिन की छुट्टियाँ उसको इस शर्त पे मिली थी कि अगले 3 महीने वो एक भी दिन ऑफिस मिस नहीं करेगा। अजीत और श्रेया की शादी घरवालों की मर्ज़ी से हुई थी। दोनों लोग अपने आप में हर तरीके से सम्पूर्ण थे चाहे वो सुंदरता हो या बुद्धिमत्ता या फिर आर्थिक स्थिति लेकिन दोनों का आपस में रिश्ता उस तेज़ी से नहीं बढ़ रहा था जिस तेज़ी से अजीत को उम्मीद थी। शादी होने के 2 महीने बाद भी श्रेया अजीत के करीब नहीं जा पा रही थी। अजीत ने कोशिश करी काफ़ी बार उसका मन पढ़ने की, दूरियां कम करने की, उसको अपने करीब लाने की लेकिन श्रेया को किसी भी इंसान को जान ने के लिए, परखने के लिए समय चाहिए था। वो चाह कर भी इतनी तेज़ी से नहीं जा सकती थी जितनी अजीत को उम्मीद थी। ये बात श्रेया ने पहले ही बता दी थी और अजीत समझने की कोशिश करने को तैयार भी हो गया था। जब जब वो पास आने की कोशिश करता था श्रेया को नाराज़गी या घृणा का एहसास नहीं होता, बस मन में अजीब सी बेचैनी उठती थी और वो रोक देती थी श्रेया को आगे बढ़ने से, उसे डर लगता था किसी क करीब आने में बिना उस इंसान को जाने, बिना उसके मन की सच्चाई देखे। दुनिया के लिए होगा आसान इस तरह पास आना लेकिन श्रेया सबसे अलग थी। सिर्फ एक इंसान मिला था उसे जिसके साथ वो इस कदर मिली थी जिस तरह कभी कोई नहीं आया न शायद आ पाएगा – देव।

क्या वो उससे प्यार करती थी? पता नहीं।

क्या वो उससे प्यार कर सकती थी? पता नहीं।

क्या वो उससे दूर जाना चाहती थी? कभी नहीं।

क्या वो उसके साथ रहना चाहती थी? हमेशा।

क्या वो उससे शादी करना चाहती थी? शायद।

क्या उन दोनों की शादी हुई? नहीं।

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एक शाम अजीत ऑफिस से आकर कहता है – “ये देखो स्विट्ज़रलैंड की दो टिकट। अगले हफ्ते हम दोनों वहां जा रहे हैं घूमने, 15 दिनों के लिए। बहुत सुन्दर जगह है, झरने, पर्वत, बर्फ और भी ना जाने क्या क्या।”

“ठीक है। मैं तैयारी करती हूँ।” श्रेया ने बोला।

“क्या हुआ तुम्हे पसंद नहीं आया मेरा प्लान।” कुछ बहुत ज्यादा ख़ुशी ना देखते हुए अजीत ने पूछा।

“नहीं ऐसी बात नहीं है। वो बस यूँही अचानक से इतनी दूर जाने का सुना तो थोड़ा सा लगा मुझे। हाँ मैंने भी सुना है अच्छी जगह है।” इस बार वो थोड़ा मुस्कुराते हुए बोली।

“ये हुई ना बात। चलो अब शॉपिंग और तैयारी के लिए ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। जल्दी से सोच लो तुम्हे क्या क्या चाहिए फिर इस शनिवार जाकर ले आते हैं।”

“ठीक है मैं कल आपको बताती हूँ।”

अगले 5 दिन सामान खरीदने में और वहां की बुकिंग करने में ही निकल गए।

अगले शनिवार को वो लोग दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से ज़ुरिक जाने वाले विमान में बैठ गए। 9 घण्टे बाद वो उतर कर अपने होटल को रवाना हो गए। पूरे सफर की तैयारी पहले ही हो चुकी थी। किस दिन किस शहर में कौन से होटल में रुकना है ये सब पहले से निश्चित था। अगले 7 दिन वो काफी जगह घूमे। बहुत अच्छी अच्छी जगह पर गए। वहां का स्थानीय खाना-पीना, रिवाज़, लोगो से मेल, मस्ती करते हुए दोनों लोग सफर का आनंद ले रहे थे। अभी तक कुछ ऐसा नहीं हुआ था जिस से श्रेया को कोई चिंता करनी पड़े। वो भी सफर में रम गयी थी। सातवें दिन वो लोग जिनीवा शहर के एक होटल में रुके हुए थे। रात को होटल में बने रेस्त्रां में खाना खाने के बाद वो लोग अपने कमरे में वापस आए और कपड़े बदलने अलग अलग कमरों में चले गए। 10 मिनट बाद श्रेया अपने कानों से बालियां उतार रही थी। अजीत ने पीछे से आकर उसके कंधो पर अपने हाथ रखे और बहुत हलके से दबाया।

“तुम्हे यहाँ अच्छा लग रहा है ना।” अजीत ने कंधो पर हाथ फेरते हुए पूछा।

“हाँ, अच्छा है।” ड्रेसिंग टेबल के बड़े से शीशे में उसने अजीत का चेहरा अपने कानों के पास आते हुए देखा।

“मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है। ऑफिस की खिटपिट से दूर, दिल्ली में होने वाले प्रदुषण और शोरगुल से दूर कितनी शान्ति है न यहाँ?” अपना एक हाथ दाहिने कंधे से सरकाते हुए श्रेया की उंगलियों तक पहुंचाया।

श्रेया ने मुट्ठी बंद कर ली और अब तक वो अजीत का इरादा जान गयी थी। अजीत की साँसे अब वो अपने कान के पास महसूस कर सकती थी।

दाहिने हाथ से श्रेया की कलाई को पकड़ते हुए अजीत ने बायां हाथ उसकी कमर पे रखा और आगे की तरफ बढ़ने लगा। हर एक चौथाई इंच हाथ बढ़ने के साथ साथ श्रेया की धड़कन 2 गुना बढ़ने लगी। वो जानती थी कि ये गलत नहीं है लेकिन अभी वो इसके लिए तैयार नहीं थी। जैसे ही अजीत का हाथ उसके पेट तक पंहुचा वो थोड़ा घबरा गयी और हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

“आज बाहर मौसम काफ़ी ठंडा है। है ना? मैं स्वेटर लेकर आती हूँ दुसरे रूम से, तब तक आप भी लेट जाइये।”  अपने हाथ से अजीत का हाथ हटाते हुए बोली।

अजीत ने हाथ नहीं छोड़ा बल्कि श्रेया को अपनी तरफ घुमा लिया। दोनों हाथो से कंधो के थोड़ा नीचे से पकड़ कर उसे एक बार फिर से घुमाया और पीछे बेड पर बिठा दिआ। खुद भी साथ में बैठ गया और उसके चेहरे को देखते हुए कहा-“मुझे मालूम है तुम्हे डर लगता है, और तुम अभी कुछ नहीं करना चाहती। लेकिन ये डर कभी तो निकालना ही है ना? तो क्यों ना इस हसीं शहर में शुरुआत करी जाए।” कहकर वो धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा और श्रेया की साँसे हर पल के साथ और तेज़ होती गयीं। कुछ देर बाद उसने अपने होठ श्रेया के होठो से सटा दिए और हल्के से एक बार चूम कर पीछे हट गया। श्रेया का चेहरा सफ़ेद पड़ चुका था और हाथ पैर एकदम ठण्डे। इसी बीच अजीत ने एक हाथ उसकी गर्दन के पीछे रखा और पीठ पर फेरने लगा। वो दोबारा आगे बढ़ा इस बार श्रेया ने आँखे बंद कर ली और बंद करते ही उसके सामने देव का चेहरा दिखाई पड़ा जैसे वो कहता था- “किस करते समय तो आँखे बंद कर लिया कर।” श्रेया कभी नहीं करती थी। आज जब पहली बार उसने आँखे बंद करी तो सामने फिर वही चेहरा था- देव का मुस्कुराता हुआ चेहरा। घबरा के उसने अपनी आँखे खोल ली, और वो क्या देखती है के अजीत के पीछे देव खड़ा है। डर के मारे वो अचानक पीछे हट जाती है, अजीत पूछता है क्या हुआ? श्रेया के मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल पाती सिर्फ एक शब्द छोड़ कर। वो बस  एक ही नाम ज़ोर ज़ोर से बोलती है – देव!!

“देव!!”

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“देव!!”

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“देव!!”

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“क्या हुआ श्रेया?”

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“देव !!”

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“हाँ बच्चा मैं यहीं हूँ।”

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“देव!!”

“क्या हुआ बाबा। कोई सपना देख रही थी क्या?”

“देव! तुम कहाँ चले गए थे?”

“क्या कह रही हो? मैं कहीं नहीं गया था। यहीं हूँ तुम्हारे साथ।” देव ने उसे गले लगाते हुए कहा।

“नहीं तुम मझे छोड़ गए थे। वो अजीत, हमारी शादी, स्विट्ज़रलैंड, अजीत , वो मुझे किस कर रहा था।”रुक रुक कर टुकड़ो में वो कुछ कहना चाहती थी लेकिन कुछ मतलब नहीं बना पा रही थी।

“कौन अजीत? किसकी शादी? हमारी शादी को 3 हफ्ते हो चुके हैं।”

“हमारी शादी हो गयी?” बौखलाई हुई हालत में श्रेया के मन में हज़ार सवाल आ रहे थे। जिनका जवाब उसको अभी समझ नहीं आ रहा था।

“हाँ बच्चा! शायद कोई बुरा सपना देखा है तुमने। रुको मैं पानी लेकर आता हूँ।”कहकर उसने लाईट जला दी।

अनजान कमरा देख कर श्रेया ने पूछा- “ये कौन सी जगह है? मैं तो स्विट्ज़रलैंड में थी वो अजीत, वो मेरे करीब आ रहा था।”

“हम ग्रीस में हैं! पिछले 5 दिनों से। और ये अजीत कहाँ से आया बीच में?” पानी का गिलास आगे बढ़ाते हुए वो बोला।

“अच्छा सुनो! हमारी शादी को 3  हफ्ते हो चुके हैं। हम ग्रीस घूमने आये हैं। डिनर के बाद हम ‘the lacemaker’ मूवी देख रहे थे, उसमे स्विट्ज़रलैंड की कहानी थी और उस लड़की का प्रेमी उसे छोड़ कर चला जाता है। तुम वो देखते देखते ही सो गयी थी इसिलए शायद ये सपना आया।”

“मतलब मेरी शादी अजीत से नहीं हुई?”

“कौन है ये अजीत? हाँ? कहाँ से ले आयी इसे? 3 हफ्ते में ही मुझसे मन भर गया क्या?”

“बच्चा कोई अजीत नहीं है। तेरी किस्मत में अब ये बावला देव ही लिखा है।” मज़ाक करते हुए देव ने कहा।

“शटअप! कम एंड हग मी। यू स्टुपिड बॉय।” अपनी बाहें खोलते हुए श्रेया बोली।

“मैं बहुत डर गयी थी देव। तुम कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाओगे ना? कभी मुझे अकेला नहीं रहने दोगे ना? हमेशा मुझसे प्यार करोगे ना? कभी मुझपर गुस्सा नहीं करोगे ना?”

“नहीं! नहीं! हाँ! कभी नहीं!”उसको वापस से बाहों में जकड़ते हुए देव बोला।

“पक्का”

“हाँ बाबा! पक्का।”

“अब आप प्लीज वापस सोने की कोशिश करेंगी? और कृपा करके इस बार देव के सिवा किसी और के साथ मत जाना। हा हा हा!!!”

“शटअप! गंदे जोक मत मार। मुझे प्यार करके सुला।”

“जी मोहतरमा! और कोई फरमाइश?”

“नहीं। अच्छा सुन”

“हांजी बोलिये।” उसके सर पे हाथ फेरते हुए देव बोला।

“I Love You.”

“I Love You Too.”

 

~DM

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